दुनिया लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
दुनिया लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

दूध न देने वाली 1100 गायें दे रही 3.5 करोड़ सालाना आमदन

मनुष्य के स्वार्थ का पता आप बस इसी बात से लगा सकते है की गाय को सारी ज़िंदगी माँ की तरह पूजते है और जब वो दूध देना बंद कर देती है तो लोग उन्हे भटकने के लिए छोड़ देते है। लेकिन कुछ लोग न केवल गोसेवा करके पुण्य के भागी बन रहे है बल्कि अपने जीवन स्तर को भी सुधार रहे है।

हरियाणा के गाँव लाडवा के लोगो की सोच आपको सोचने पर मजबूर कर देगी की दूध ना देने वाली गायों से भी आप उतनी ही कमाई कर सकते है जितनी की दूध देने वाली गायों से। इन लोगो ने पैसा कमाने के लिए उन गायों को चुना है जिन्हे लोग दूध न देने के कारण लावारिस छोड़ देते है।


एक गाय औसतन 10 किलो गौबर व 10 लिटर मूत्र देती है । 10 किलो से लगभग 7 किलो खाद बन जाती है। ये लोग पहले गाय के गोबर से बायो गैस बनाते है और फिर बायो गैस से निकले वेस्ट से जैविक खाद बनाई जाती है। ये खाद लगभग 35 रूपय प्रति किलो के हिसाब से बेची जाती है। इसके अलावा गाय के मूत्र से कीटनाशक एवं अर्क बनाए जाते है जो विभिन्न दवाओ को बनाने के लिए उपयोग किए जाते है। इसकी बाजार में 100 रूपय प्रति लिटर तक भी बिक्री की जाती है।

इस बिजनेस के लिए इन्हे कोई भी गाय खरीदनी नहीं पड़ती और चारे पर 50 रूपय /प्रति गाय खर्चा आता है।
इसके विपरीत यदि आप एक अच्छी गाय खरीदना चाहे तो ये लगभग 50000-150000 के बीच मिल पाती है। इसके अलावा सपलीमेंट और रख रखाव का खर्चा ही लाखो रूपय होते है।

पंजाबी बनी कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स में तीसरी आम भाषा

टोरेंटों : चार साल पहले पंजाबी को कनाडा की तीसरी सबसे आम भाषा के रूप में मान्यता दी गई थी लेकिन अक्टूबर में 20 पंजाबी बोलने वाले उम्मीदवारों के संसद में चुने जाने के बाद, कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स में भी अंग्रेजी और फ्रेंच के बाद पंजाबी को आधिकारिक तौर पर आम भाषा के रूप में मान्यता दी गई है | अक्टूबर,19 के आम चुनाव के बाद कुल में से भारतीय मूल के 23 सांसदों को निर्वाचित किया गया था जिनमे से तीन पंजाबी में बात नहीं करते ।


कनाडा के 2011 राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण के मुताबिक, 430,705 कनाडाई लोग पंजाबी है जो की कनाडा की आबादी का कुल 1.7 % है | इसके अलावा 20 पंजाबी बोलने वाले सांसद हाउस ऑफ कॉमन्स में 6 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं

"डैथ एक्सपिरियन्स" | मौत से पहले

दक्षिण कोरिया आत्महत्या के मामले में विश्व में दूसरे नंबर पर है| इस देश में 40 लोग रोजाना दबाब भरी ज़िंदगी से तंग आ कर अपना जीवन खो देते है| इसी के मद्देनज़र स्कूलो में “डैथ एक्सपिरियन्स “ कार्यकर्म लॉंच किया गया है ताकि डिप्रेशन झेल रहे लोग मौत का अनुभव कर सकें| बच्चों को ताबूत में लेटा कर उनकी तस्वीरों के साथ नकली शव यात्रा निकली जाती है |

प्रतिभागियों को एक नकली अंतिम संस्कार का अनुभव प्रदान किया जाता है जिसमें वे अपने रिश्तेदारों को पत्र लिखते है ,अपनी वसीयत लिखते है और ताबूत में बंद हो जाते है |

मार्च में भी शिक्षा मंत्रालय द्व्वारा एक स्मार्टफोन एप्लिकेशन को विकसित किया गया है जो स्टूडेंट्स के सोश्ल मीडिया पोस्ट,संदेशों ओर आत्महत्या से संबंधित सर्च किए गए शब्दो को फिल्टर कर आत्मघाती जोखिम की जानकारी माता-पिता को उपलब्ध करवाता है |