आइए जाने क्यों है पानी अमृत | Health Benefits of Drinking Water

पानी मनुष्य के शरीर का मुख्य घटक है। वास्तव में शरीर का 55 से 78% भाग पानी की रचना है और शरीर के आकार पर निर्भर करता है। पर्याप्त और नियमित रूप से पानी पीने के कई स्वास्थ्य लाभ है। इसके अलावा यह कैलोरी, वसा , कार्बोहाइड्रेट तथा चीनी मुक्त है। पानी की मात्रा जो आप हर रोज उपभोग करते है एक स्वस्थ शरीर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार एक व्यक्ति को दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए पीना चाहिए। पुरुषों को दिन में कम से कम 3 लिटर तथा महिलाओ को लगभग 2.2 लिटर पानी प्रतिदिन पीना चाहिए।
पानी शरीर को अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है।जो आवश्यक है, क्योंकि शरीर में लगभग हर सेल को ठीक ढंग से काम करने के लिए पानी की जरूरत होती है।

थकान से छुटकारा
यदि आप अक्सर थका हुआ महसूस करते है तो इसका मुख्य कारण पानी की अपर्याप्त खपत है जिसकी वजह से शरीर कम कुशलता से काम करता है। पानी की कमी के कारण हृदय को आक्सीजन युक्त रक्त शरीर के सभी अंगो तक पहुंचाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है और प्रमुख अंग भी कम कुशलता से काम करते हैं। इस प्रकार आप पर्याप्त पानी पीकर अपने शरीर के अंगो को बेहतर काम करने और थकान को कम में सफलता प्रपट कर सकते है।

मूड में सुधार
अनुसंधान दर्शाते है कि हल्का निर्जलीकरण भी आपके मूड पर नकारात्मक प्रभाव डालता है और आपके सोचने की क्षमता को कम करता है। आपके मूत्र का रंग हाइड्रेशन के स्तर का एक अच्छा संकेत है। हल्का रंग बेहतर हाइड्रेशन का सूचक है और गहरा रंग डीहाइड्रेशन का।

सिर दर्द को कम करने में
यदि आप सिर दर्द या माइग्रेन से ग्रसित है तो पहली चीज जो आप कर सकते है वो है अधिक से अधिक मात्र में पानी पीना। सिरदर्द अक्सर निर्जलीकरण के कारण होता है। तंत्रिका विज्ञान के यूरोपीय जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया है की पानी अधिक पीने वालों में सिर दर्द की अवधि कम हुयी तथा उसकी तीव्रता को कम करने में भी कामयाबी पायी गयी।

पाचन और कब्ज में मदद करता है
 पानी जठरांत्र संबंधी मार्ग के कामकाज में सुधार करता है। यह पाचन में मदद करता है और कब्ज से बचाता है। शरीर में पानी की कमी कब्ज का कारण बनती है क्यों की मल पतला नहीं हो पाता और उसे पारित करने
में बहुत कठिनाई होती है। पर्याप्त पानी पीना मेटाबोलिस्म को बढ़ा देता है और शरीर को ठीक से खाना विघटित करने में मदद करता है। यह आपके पाचन तन्त्र की ठीक से काम करने में मदद करता है और नियमित रूप से मल त्याग को बढ़ावा देता है। गर्म पानी, विशेष रूप से, पाचन स्वास्थ्य के लिए अच्छा है ।

वजन घटाने में मदद करता है:
एक चिकित्सीय परीक्षण में वैज्ञानिकों ने पाया है की दो आठ-औंस गिलास पानी भोजन से पहले भूख को दबाने और वजन को कम करने के प्रयासों में मदद करते हैं। जब आप पानी पीते हैं, यह आपके पेट को भरता है और अधिक खाने की प्रवृत्ति को कम कर देता है । यह शरीर में वसा के जलाने की प्रक्रिया को तेज़ करता है और वसा कोशिकाओं के टूटने और उन्मूलन को बढ़ावा देता है।

विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। 
पानी आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलवाने और मुख्य रूप से पसीने और मूत्र के माध्यम से कचरे से छुटकारा पाने में मदद करता है । यह गुर्दे की काम करने की क्षमता को बढ़ाता है और लवण तथा खनिज पदार्थो को मूत्र द्वारा बाहर निकाल कर गुर्दे की पत्थरी की समस्या से बचाव करता है। यद्धयपी आपको दिन में केवल पर्याप्त मात्रा में ही पानी पीना चाहिए क्यों की विशेषज्ञों की एक चेतावनी के अनुसार बहुत अधिक पानी पीना गुर्दे की अपशिष्ट पदार्थो को बाहर फिल्टर करने की क्षमता को कम कर सकता है।

शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है
पानी की प्र्याप्त मात्रा शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करती है। अच्छी तरह से विनियमित शरीर का तापमान आपको ऊर्जावान बनाए रखता है। पानी आपके शरीर के जोड़ों और मांसपेशियों में लूब्रिकेंट की तरह कार्य करता है तथा ऐंठन और मोच को रोकने में मदद करता है ।

स्वस्थ त्वचा को बढ़ावा :
पानी शरीर को अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रखता है और केशिका रक्त प्रवाह (capillary blood flow) को बढ़ावा देता है जो बदले में त्वचा की नमी और सुंदरता को बनाए रखने में मदद करता है। जब आपके शरीर को प्रयाप्त पानी मिल जाता है तो आपकी त्वचा ताजा,नरम और चिकनी दिखाई देगी। इसके अलावा पानी लाइनों , निशान, मुँहासे, झुर्रियाँ और उम्र बढ़ने के अन्य लक्षणों के उपचार में मदद करता है।

नशे को कम करने के लिए : 
पानी एक सरल और प्रभावी तरीके के रूप में नशे से मुक्ति पाने में मदद करता है। एक मूत्रवर्धक होने के नाते,शराब अधिक पैशाब आने का कारण बनती है और पानी की कमी का भी। इस प्रकार पानी आपके शरीर को पुनः हाइड्रेट करके ठीक होने की प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद करता है ।

विशेषज्ञ, यदि आप ने बहुत अधिक शराब पी ली है तो, रात को सोने से पहले कम से कम 20 औंस पानी पीने की सलाह देते हैं।

मुह की बदबू को कम करने :
मुह से आने वाली बदबू इस बात का प्रमाण है की आप पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं पी रहे। यह आपके मुह में नमी बनाए रखता है और खाद्य कणों और बैक्टीरिया को दूर करने में मदद करता है। शरीर में पानी की उचित मात्रा को बनाए रखने के लिए आप फ्रूट जूस इत्यादि का भी सेवन कर सकते है।

दोस्तो आम फल ही नहीं बल्कि एक औषधिय पौधा भी है। Health Benefits of Mango & Mango Tree

आम का नाम सुनते ही दोस्तो मुह में पानी आ जाता है। इसे फलो का राजा भी कहते है। आम का पेड़ स्वादिष्ट फल देने के साथ साथ अनेक रूपो में उपयोग होता है। इसकी लकड़ी मजबूत होती है। इसलिए इसका उपयोग इमारतों के निर्माण एवं फ़र्निचर के निर्माण में होता है। वहीं इसकी लकड़ी का धार्मिक महत्व भी कम नहीं है। कोई भी धार्मिक अनुष्ठान आम के पत्तों और इसकी लकड़ी के बिना सम्पन्न नहीं होता।

आम के पेड़ से प्राप्त दूध से गोंद बनाया जाता है। कच्चे आमों का उपयोग मुरब्बा एवं आचार बनाने में होता है। कच्चे आम से तैयार आमचूर का उपयोग शाक सब्जी चटनी बनाने में होता है।

पका आम मधुर, वीर्यवर्धक, सनग्ध, बल तथा सुखदायक, भारी, वातनाशक, हृदय को प्रिय, वर्ण को शांत करने वाला, शीतल, पित को न बढ्ने वाला होता है।

इन सभी गुणो के साथ साथ आम एक औषधीय पौधा भी है जो हमे कई स्वास्थ्य समस्यायों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। आइए जाने ऐसे ही कुछ गुणो के बारे में:

मधुमेह पर: महुमह हो जाने पर आम के नए कोमल पत्तों को सुखाकर चूर्ण रूप में सेवन करना चाहिए। इससे मधुमेह दूर होता है।

जलन पर: आग से जल जाने पर आम के पत्तों की भस्म को आग से जले स्थान पर तरल पदार्थ में मिलाकर लगाने से घाव जल्दी भर भर जाते है और जलन भी कम होती है।

पेट दर्द में : किसी प्रकार के पेट दर्द होने पर आम की गुठली आग में भूनकर नमक मिलाकर सेवन करने से दर्द दूर होता है।
खून बहने पर: किसी भी कारण से बहते खून को रोकने में आम की छाल का चूर्ण लाभदायक होता है। इसको लगाने से रक्त बहना तुरंत रुक जाता है।

अतिसार पर: गर्भवती स्त्री को अतिसार हो जाने पर आम की गुठली खिलाने से अतिसार ठीक हो जाता है।

पसीने पर : अधिक पसीना आने पर गुठली को पीसकर उसका चूर्ण लगाने से पसीना कम आता है।

नाक से खून आने पर: आम की गुठली का रस नाक में डालना लाभदायक होता है।

रक्तावली कै आने पर: मिचली के साथ कै आने पर जिसमें रक्त की मात्रा हो, आम की गुठली का रस नाक में डालना फायदेमंद होता है। इससे मिचली बंद हो जाती है तथा रक्त का आना बंद हो जाता है।

कान दर्द में : कान में पीड़ा होने पर आम के भौर का रस तेल में मिलाकर कान में डालने से तुरंत लाभ होता है।

सिर दर्द में : सामान्य या विशेष रूप से में दर्द होने पर आम की गुठली ओर चोटी हर्र को बारीक कूटकर उसको दूध में मिलाये फिर इसका लेप सिर पर करने से सिर दर्द में आराम मिलता है।


अंडकोष बढ़ जाने पर: अंडकोष का बढ़ जाना एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन इसका बढ़ जाना दर्द को बढाता है। इसके बढ़ जाने पर आम के वृक्ष की गांठ को पीसकर उसको दूध में मिलाकर लेप तैयार कर ले फिर इस लेप को अंडकोष पर लगाए और साथ ही गरम सेक करें। इससे वृद्धि रुक जाती है और कष्ट नहीं होता।

स्वर विकृति पर: स्वर बिगड़ जाने या हकलाने की समस्या उत्पन्न हो जाने पर आम के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसे शहद के साथ पीना स्वर विकृति को ठीक करने में सहायक होता है।

पेट में कीड़े हो जाने पर: पेट में कीड़े हो जाने पर आम की गुठली का चूरन शहद के साथ लेना लाभकारी होता है। इसके सेवन से कृमि का नाश होता है।

गर्मी हो जाने पर: किसी भी प्रकार की गर्मी उत्पन्न हो जाने पर आम के अंडर की छाल पीसकर दूध और शहद के साथ लेने से गर्मी दूर हो जाती है।
कमजोरी उत्पन्न होने पर: खाने के साथ आम का सेवन शक्तिवर्धक होता है। इसका सेवन करने से किसी भी प्रकार की कमजोरी का अंत होता है और सफूर्ति मिलती है।

लू लगने पर: गर्मी के मौसम में अत्याधिक गर्मी से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इस कारण लू लगने की संभावना रहती है। इससे बचाव के लिए कच्चे आम को आग में पकाकर उसका रस निकाल कर पीना चाहिए। लू लगने पर इसका सेवन फायदेमंद होता है।

आइए जाने आवलें के औषधिय गुणो के बारे में | Health Benefits of Indian Gooseberry or Amla


भारतीय करौदा(Indian Gooseberry) जिसे आवलाँ के नाम से जाना जाता है, प्राचीन आयुर्वेद में एक चमत्कारी भोजन के रूप में माना जाता था। विटामिन सी और अन्य पोषक तत्वों की प्रचुरता इसे एक सुपर भोजन बनाती है। यह अभी भी अपने जाने-माने स्वास्थ्य लाभो के लिए विभिन्न रूपों में प्रयोग किया जाता है।

आवलाँ एक बहुत खट्टा फल है और भारत और उष्णकटिबंधीय दक्षिण पूर्व एशिया में ज्यादातर पाया जाता है। इसके स्वाद के कारण हो सकता है यह आपको पसंद ना आए परंतु इसके स्वास्थ्य लाभ इतने ज्यादा है की आप उनकी कल्पना भी नहीं कर सकते। स्वादिष्ट चटनी , अचार, जैम, मुरब्बे और जूस के रूपों में आप इस फल के स्वाद का आनन्द ले सकते हैं।

आवलें के उपयोग औषधि के रूप में:

बुखार व अतिसार में : आवलें का रस, अंगूर व शहद के साथ मिश्रित कर शर्बत के रूप में सेवन करने से ज्वर व अतिसार जैसे रोगो में आराम मिलता है।

प्रदर में : प्रदर में आवलें का चूरन बना कर उसे शहद व मिश्री के साथ मिलाकर सेवन करने से सफ़ेद प्रदर दूर हो जाता है।

सिर दर्द में: सिर दर्द करने पर या फिर सिर ब्भरी रहने पर आवलें का चूरन गुलाब जल में मिलकर सिर के ऊपर लेप करने से आराम मिलता है।

नेत्र संबंधी समस्या में: आवलें के बारीक चूरन को रात के समय ठंडे पानी में भिगोकर छोड़ दें। सुबह इसे साफ कपड़े से छान लें। छने पानी से आंखो को धोने से आँखों का दर्द व आँखों से संबन्धित हर रोग में आराम मिलता है।

अरुचि में : अरुचि उत्पन्न होने पर आवलें को उबालकर पीने से लाभ होता है। वन्ही आवलें के साथ जीरा, काली मिर्च, अदरक, धनिया, दालचीनी तथा सेंधा नमक डालकर पीसकर गोली बना लें। यह पाचक जैसा काम करती है। इसका सेवन अपच की स्थिति में लाभ प्रद है।

मिचली पर : जी मिचलाने या बार बार उल्टी आने पर सूखे आवलें का चूरन व चन्दन का चूरन साथ लेकर शहद के साथ खाने से तत्काल उल्टी बंद हो जाती है।

वीर्य वृद्धि के लिए: कच्चे आवलें के रस में घी मिलाकर नियमित सेवन करना चाहिए। इससे वीर्य वृद्धि होती है।
नाक से खून आने पर: आवलें को घी में डुबोकर आग में सेंके फिर इसका लेप सिर पर करें। इससे नाक से खून आना रुक जाता है।

खाज व खुजली पर : खाज व खुजली उत्पन्न हो जाने पर सूखे आवलें को तेल में मिलाकर खुजली वाले स्थान पर लगाने से खाज व खुजली दूर हो जाती है।

मुँह सूखने पर : आवलें व अंगूर को घी में पीसकर उसकी गोली बना लें। तथा इस गोली को मुंह में डालने से मुंह सुखना बंद हो जाता है।

पेशाब का रुक रुक के आना: पेशाब का रुक रुक कर आने या पेशाब आने पर जलन होने पर आवलें के रस में मिश्री डालकर दिन में दो तीन बार लेने से पेशाब संबंधी समस्या दूर हो जाती है।

उदर सम्बन्धी विकार : आवलें का मुरब्बा बनाकर खाने से उदर सम्बन्धी विकार दूर हो जाते है।

सिर व बालों के लिए: आवलें के रस में नारियल का तेल डालकर पकाकर आवलें का तेल तैयार किया जाता है। इसके इस्तेमाल से सिर ठंडा रहता है। वन्ही इसके नियमित इस्तेमाल से बाल काले, घने, व रेशम जैसे मुलायम रहते है।

मूर्छा में : आवलें के र में घी मिलाकर पिलाने से मूर्छित व्यक्ति में चेतना लौट आती है।

आइए जाने कैसे करें कब्ज को छूमंतर | Home Remedies for Constipation

कब्ज एक आम पाचन विकार हे जो सभी उम्र के लोगो को प्रभावित करता है। कब्ज मल को बाहर निकालने में कठिनाई का कारण बनती है और कभी कभी तो ये समस्या बहुत अधिक बढ़ भी जाती है। कब्ज के मुख्य लक्षणो में पेट का फूलना, असामान्य रूप से छोटे या बड़े मल, अम्लता , भूख न लगना , बुरा सांस , सिर दर्द, अवसाद , मुँहासे, और मुंह में अल्सर इत्यादि शामिल है।
कब्ज के मुख्य कारणों में से खराब आहार, अपर्याप्त पानी का सेवन , अनियमित शौच की आदत , शारीरिक श्रम का अभाव , पेट की मांसपेशियों की कमजोरी, बवासीर, तनाव, दवाओं का सेवन इत्यादि शामिल है।

आप पाचन तंत्र की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए और कब्ज के इलाज के लिए कई घरेलू उपचार प्रयोग में ला सकते है।

नींबू :
नींबू या विशेष रूप से नींबू के रस कब्ज का इलाज कर सकते हैं। यह पाचन तंत्र को उत्तेजित करता है। यह सबसे आसान और प्रभावी उपचार में से एक है जिसे आप घर पर कोशिश कर सकते हैं। गुनगुने पानी के एक गिलास में आधा नींबू निचोड़ ले और इसमें एक चुटकी सेंधा नमक और एक चम्मच शहद मिला लें। इसका इस्तेमाल सुबह खाली पेट करें। आप चाहे तो इसका इस्तेमाल शाम को भी कर सकते है। कुछ ही दिनो में आप फर्क महसूस करेंगे। (आइए जाने नींबू का उपयोग करके हम कौन-कौन सी स्वास्थ्य समस्याओ से छुटकारा पा सकते है और कैसे?)

सौंफ़:
सौंफ़ के बीज अपच , सूजन, कब्ज और चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम जैसे मुद्दों के उपचार में उपयोगी होते हैं।
वे पाचन तंत्र में मांसपेशियों की चिकनाहट बनाए रखने में मदद करते है। एक कटोरी सौंफ़ के बीज की ले कर उन्हे भून लें और फिर इसका महीन चूरन बना ले। इस स्वादिष्ट और पाचन पाउडर को किसी सूखे बर्तन में स्टोर कर लें एवं इसका आधा चम्मच प्रतिदिन गरम पानी के साथ लें।

अंजीर:
अंजीर बहुत फाइबर में बहुत उच्च हैं और एक प्राकृतिक रेचक (natural laxative) के रूप में काम करते हैं। पुरानी कब्ज से पीड़ित लोगों को अपने आहार में अंजीर को शामिल करना चाहिए। कब्ज के उपचार के लिए, दोनों ताजा और सूखे अंजीर का इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि ताज़ा अंजीर उपलब्ध है तो इसका इस्तेमाल छिलके के साथ करें। इसके छिलके में फाइबर और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। 2-3 बादाम और सूखे अंजीर लें। कुछ घंटों के लिए उन्हें पानी में भिगो दें। बादाम का छिलका उतार कर ,बादाम एवं अंजीर को पीस लें। इस पेस्ट का इस्तेमाल रात को शहद की एक चम्मच के साथ करें।

अरंडी का तेल :
एक उत्तेजक रेचक होने के नाते , अरंडी का तेल छोटी और बड़ी आंत को उत्तेजित करता है और मल त्याग में सुधार करता है। बस एक खाली पेट पर अरंडी के तेल की 1-2 चम्मच निगल लें। स्वाद में सुधार करने के लिए, आप इसे फल के रस के साथ भी ले सकते हैं । कुछ ही घंटों के भीतर, आपको अपनी हालत में एक बड़ा सुधार नज़र आएगा। आप एक लम्बी अवधि के लिए इस उपाय को दोहराए नहीं इसके दुष्प्रभाव हो सकते है।



शहद:
शहद एक हल्के रेचक के रूप में कार्य करता है और कब्ज से राहत में बेहद फायदेमंद है। आप इसका इस्तेमाल कब्ज से बचने एवं कब्ज के इलाज दोनों में कर सकते है। दिन में 2-3 बार एक चम्मच शहद का इस्तेमाल आप कर सकते है। इसके अलावा आप इसे एक गिलास गरम पानी में नींबू के रस के साथ भी उपयोग में ला सकते है।

अलसी का बीज:
अलसी के बीज में फाइबर और ओमेगा -3 फैटी एसिड के साथ साथ कई अन्य औषधीय गुण है। इसके अलावा , अलसी कब्ज के हल्के करने, बहुत गंभीर मामलों का इलाज करने में बहुत उपयोगी हो सकता है। एक गिलास पानी में अलसी के बीज भिगो दे एवं रात को सोने से पहले इस पानी का सेवन करें। इसके अलावा आप रात को सोने से पहले एक चम्मच अलसी के बीजो का सेवन पानी के साथ भी कर सकते है।
अंगूर:

अंगूर में मौजूद अघुलनशील फाइबर नियमित मल त्याग उत्पादन में मदद करता है। दैनिक एक छोटी कटोरी अंगूर जरूर खाओ या फिर कम से कम आधा गिलास अंगूर के जूस का जरूर पियो। इसके अलावा आप 10-12 सूखे अंगूर ले कर उन्हे दूध में उबाल कर भी खा सकते है। यह उपाय बच्चो को कब्ज से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। यदि ताज़ा अंगूर उपलब्ध नहीं है तो आप पानी में भिगो कर किशमिश का इस्तेमाल भी कर सकते है।

पालक:
पालक पाचन तंत्र के लिए बहुत उपयोगी है खासकर जब आप कब्ज से पीड़ित हो। कच्चे पालक में मौजूद विभिन्न घटक पूरे आंत्र पथ को साफ, संगठित और पुनर्जीवित कर सकते हैं। कब्ज से छुटकारा पाने के लिए, आपको अपने आहार में पालक को शामिल करना चाहिए। आप इसे कच्चा या पका कर खा सकते है, ये आपकी पसंद पर निर्भर करता है। यदि कब्ज ज्यादा गंभीर है तो आप आधा गिलास कच्चे पालक के पत्तों के जूस का इस्तेमाल आधा गिलास पानी के साथ कर सकते है। कुछ ही दिनों के भीतर, आपको बहुत राहत मिल जाएगी।

गुड़ :
गुड खाने के फायदे | बिस्तर पर जाने से पहले गुड का एक टुकड़ा या चम्मच जरूर लें। यदि आपको इसका स्वाद पसंद नहीं है तो आप इसे दूध में दाल कर या फिर फलो के जूस के साथ इस्तेमाल कर सकते है। यदि समस्या फिर भी ठीक नहीं होती तो गुड की मात्रा को आप बढ़ा सकते है। गुड़ उच्च कैलोरी युक्त होता है , तो आपको दैनिक आधार पर इस उपाय का पालन नहीं करना चाहिए।( गुड खाने के फायदे | health benefits of Jaggery)


पानी एवं फाइबर:
अधिकतर कब्ज का मुख्य कारण आहार में फाइबर की कमी है। यह आंतों में पानी की मात्रा को बनाए रखता है जो माल को पतला होने में मदद करता है। उच्च फाइबर आहार में सेम, आलू, गाजर, ब्राउन चावल, prunes, गेहूं के बीज, ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे खाद्य पदार्थ, नट, कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज, ब्रोकोली, मटर इत्यादि शामिल है।

कब्ज से पीड़ित लोगो को दिन में कम से कम 10-12 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। इसके अलावा आप फलो के रस का भी सेवन कर सकते है। मादक पेय पदार्थों और कैफीन से बचें ये निर्जलीकरण के रूप में आपकी हालत और भी खराब कर सकते है।

और सबसे महत्वपूर्ण बात डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।